FCRA का पूरा नाम Foreign Contribution (Regulation) Act (विदेशी अंशदान नियंत्रण अधिनियम) है।
सरल शब्दों में कहें तो यह भारत सरकार का एक कानून है जो यह तय करता है कि भारत में कोई भी व्यक्ति, NGO, ट्रस्ट या संस्था विदेश से कितना और किस तरह से पैसा (फंड या डोनेशन) ले सकती है । 1. FCRA का मुख्य उद्देश्य क्या है? पारदर्शिता (Transparency): यह देखना कि विदेश से आ रहा पैसा सही काम (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत कार्य) के लिए आ रहा है या नहीं। राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security): यह सुनिश्चित करना कि विदेशी फंड का इस्तेमाल चुनाव प्रभावित करने, देश विरोधी गतिविधियों, धर्म परिवर्तन (Proselytization) या गैर-कानूनी कामों में न हो। 2. FCRA के प्रमुख नियम (Rules) रजिस्ट्रेशन जरूरी: विदेश से कोई भी फंड पाने के लिए NGO या संस्था के पास FCRA Certificate/License होना अनिवार्य है। बैंक खाता: सारा विदेशी चंदा केवल सरकार द्वारा तय किए गए विशेष बैंक खाते (जैसे SBI, नई दिल्ली मुख्य शाखा) में ही आना चाहिए। प्रशासनिक खर्च की सीमा: विदेशी फंड का केवल एक निश्चित हिस्सा (अधिकतम 20%) ही ऑफिस चलाने या सैलरी जैसे प्रशासनिक कामों पर खर्च किया जा सकता है। इन पर विदेशी फंड लेने पर बैन है: ...