Food label reading: Read before you eat - खाने से पहले फूड लेबल पढ़ें

 महोदय,

खाद्य पदार्थों (फूड) के लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी (Nutrition information) को उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करने का एक प्रमुख साधन माना जाता है।[1,2] हालांकि, क्या उपभोक्ता ऐसे लेबल पर ध्यान देते हैं, क्या वे उन्हें पढ़ते और समझते हैं, और क्या वे खरीदारी के फैसलों में उनका उपयोग करते हैं? कई उपभोक्ता अनुसंधान अध्ययनों[3-5] ने इन सवालों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है। 

फूड लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी न्यूट्रिशन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन आमतौर पर उपभोक्ताओं द्वारा इसका पूरा उपयोग नहीं किया जाता है। फूड लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी उपभोक्ताओं तक इस बात को पहुँचाने का एक लागत प्रभावी (cost-effective) तरीका हो सकती है, क्योंकि अधिकांश पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के लिए यह जानकारी बिक्री के समय (point of sale) पर ही सामने मौजूद होती है।[6] हालांकि उपभोक्ता यह तय करते समय पोषण को महत्व देते हैं कि कौन सा भोजन खरीदा जाए,[7] फिर भी फूड लेबल पर दी गई जानकारी जटिल होती है और हमेशा प्रभावी ढंग से संवाद करने की अपनी क्षमता पर खरी नहीं उतरती है।[8-11]
इसी संदर्भ में, यह पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण (सर्वे) किया गया था कि क्या इंदौर शहर के उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय फूड पैकेज लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी का ज्ञान है, और वे भोजन चुनने के लिए उस ज्ञान का किस हद तक उपयोग करते हैं। इस सर्वे में कुल 838 व्यक्तियों ने भाग लिया। परिणाम उपभोक्ताओं की जागरूकता, ज्ञान और फूड लेबल के उपयोग के साथ-साथ पोषण संबंधी जानकारी की ठीक से व्याख्या करने और उसके अनुसार भोजन के विकल्प चुनने की उनकी क्षमता के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। इन परिणामों से उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले भोजन के चयन के कारणों को समझाने और ऐसे सुझाव देने में मदद मिलने की उम्मीद है जो यह सुनिश्चित करेंगे कि उपभोक्ताओं को पोषण संबंधी जानकारी के बारे में अच्छी जानकारी हो और वे जब चाहें इसका उपयोग कर सकें। इस सर्वे के निष्कर्ष स्वास्थ्य पेशेवरों और उपभोक्ता जागरूकता गतिविधियों में रुचि रखने वाले अन्य हितधारकों के लिए भविष्य की सूचना और शिक्षा रणनीतियों के लिए एक बड़े पैमाने पर जन दृष्टिकोण का आधार बन सकते हैं।
हमारे सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि अधिकांश (71.9%) प्रतिभागियों ने दावा किया कि वे खरीदारी की सूची (shopping list) का उपयोग नहीं करते हैं और उनमें से आधे से अधिक (61.8%) ने संकेत दिया कि विशिष्ट खाद्य पदार्थों का उनका चयन पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित नहीं था। खरीदारी करते समय पोषण संबंधी जानकारी के उपयोग के संबंध में भी यही रुख देखा गया है, जहां केवल 9.3% उपभोक्ताओं ने दावा किया कि वे खरीदारी करते समय उस ज्ञान का उपयोग करते हैं।
भले ही उपभोक्ता लेबल देख रहे हैं, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि वे जो पढ़ रहे हैं उसे समझें भी। दुनिया के आधे उपभोक्ताओं ने कहा कि वे भोजन पर न्यूट्रिशनल लेबल को केवल "आंशिक रूप से" (partly) समझते हैं, जिसमें एशिया-प्रशांत के नागरिक इस समझ की कमी में दुनिया में सबसे आगे (60%) हैं, इसके बाद यूरोपीय (50%) और लैटिन अमेरिकी (45%) हैं। हमारे अध्ययन में, 57.7% उपभोक्ता फूड लेबल को "नहीं समझते", जबकि 39.7% फूड लेबल की जानकारी को "आंशिक रूप से समझते हैं"।
न्यूट्रिशन लेबल में आमतौर पर कैलोरी, सर्विंग साइज (परोसने का आकार), और कई मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन और खनिजों (जैसे, वसा/फैट, कार्बोहाइड्रेट और कैल्शियम) की मात्रा और/या दैनिक मूल्यों (daily values) की जानकारी होती है।
हमारे सर्वे में, 52.5% उपभोक्ता फूड लेबल पर लिखी सामग्री की सूची (ingredients' list) को नहीं पढ़ते हैं। अमेरिकी आहार दिशानिर्देश (US Dietary Guidelines) 2010 में कहा गया है कि "सामग्री की सूची का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि किसी खाद्य या पेय पदार्थ में सिंथेटिक ट्रांस फैट, ठोस वसा (solid fats), अतिरिक्त चीनी (added sugars), साबुत अनाज (whole grains) और परिष्कृत अनाज (refined grains) शामिल हैं या नहीं।" सामग्री की सूचियों में महत्वपूर्ण पोषण संबंधी जानकारी होती है जो उपभोक्ता द्वारा किसी भोजन के स्वास्थ्यप्रद होने के मूल्यांकन में योगदान दे सकती है।
पोषण लेबलिंग जानकारी का अंतिम उद्देश्य उपभोक्ताओं को उन खाद्य पदार्थों की पहचान करने और चुनने में सहायता करना है जो एक स्वस्थ आहार में योगदान करते हैं। इसलिए, एक पोषण लेबलिंग शिक्षा रणनीति को पोषण शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित व्यापक व्यवहार परिवर्तन रणनीतियों में एकीकृत किया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को वर्तमान आहार प्रथाओं और आहार संबंधी सिफारिशों के बीच के अंतर को पाटने में मदद मिल सके। जानकारी तब तक व्यवहार में बदलाव नहीं लाती जब तक कि वह मानसिक-सामाजिक, व्यावहारिक और पर्यावरणीय बाधाओं को पार न कर ले। अंतर्निहित समस्याओं में पर्याप्त पोषण शिक्षा और ज्ञान की कमी और अंतिम उपयोगकर्ताओं (उपभोक्ताओं) तक खराब संचार शामिल हैं।
निष्कर्ष के रूप में, हमने इंदौर शहर के उपभोक्ताओं के बीच न्यूट्रिशन लेबल के कम उपयोग और समझ को पाया। उपभोक्ता वर्तमान न्यूट्रिशन पैनल पर अंकों की गणना, शब्दावली और भाषा से परिचित नहीं थे, जो बुनियादी पोषण शिक्षा और उपयोगकर्ता के अनुकूल (आसान) लेबल स्वरूपों की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।

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